Wednesday, June 8, 2011

कोई आये

कोई आये
के कोई आये
मुझ मे समाये
हाल दिल का सुनाये
और मेरे दिल की सुन जाये
घटाये जुल्फों की झुकाये
बेगाना दुनिया से बनाये
कुछ दिल की पूछ जाये
कुछ दिल की बताये
घड़ी -दो -घड़ी मे
यादे उमर भर की छोड़ जाये
मुझ को लुभाये
हाय जरा ना शरमाये
अर्पण मुझ संग लिपट जाये
फिर मेरी प्रिया -प्रिया कहलाये
दीक्षा प्रिया फसबूक दोस्त को दिल से समर्पित
राजीव अर्पण

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