Sunday, May 15, 2011

तकदीर

तक़दीर
मेरी तकदीर
अंधेरो मै
बेताब रहो की तरह
सुने सायो सी भटक रही है
एक सपनों की जिन्दगी
वो भी है
जो हसीन वादियों मे
भटक रही है
मेरे जीने की
हसीन उमगो पे
गम के बादलछाये है
लाचार लाठी पे लटक रही है
अब रहम कर
सुख का सुवेरा दिखा
मेरी तकदीर
क्यों मासूम अरमानो को
पत्थर पे पटक रही है
राजीव अर्पण

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