Saturday, May 7, 2011

खत

खत

खत प्रेम के लिखते रहे महीनों रात भर

मगर दुनिया मे हमारा कोई हमसफर ना था

हम दिल के जज्बात कहते रहे दीवरो से

कोई दिल कहने वाला हाय मुकरर न था

हम घूमा किये नगर-नगर ,शहर-शहर

जन्हा प्यार मिलता कोई ऐसा नगर ना था

अल्लाह तेरे जन्हा मे एक अजीब चीज देखी

प्यार था सब के पास लेने वाला मगर ना था

दुनिया जानती थी के यह उस का दीवाना है

पर हाय अर्पण दीवाना ,उस की नजर ना था

राजीव अर्पण रईट अस ऍम ग्रुप को समर्पित

राजीव अर्पण

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