Friday, May 20, 2011

आंसूओं को

आंसुओं को
सिखा है जिन्दगी मै गमे आंसूओं को पीना
तडप-तडप के मरना , घुट-घुट के जीना
खून बहुत जलाया तेरे पीछे मैंने सजनी
क्या हुआ जो तेरी खातिर कम बहाया पसीना
सोच तेरे तसबुर मै केसे सदिया गुजारी
पहले पल ,फिर घड़ी ,फिर दिन फिर कही महीना
प्रीत से हम जिन्दगी को सजाते रहे
इंतजार करते रहे रंग ली हीना
अर्पण जिन्दगी अपनी यु खोखली होती
सुंदर सी अन्गुती से जो ना निकलती नगीना
राजीव अर्पण

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