Sunday, May 29, 2011

जमी पे

जमी पे
है दिल कशी जमी पे ,आसमा पे नही है
तभी तो हम ने तुम्हे अपना खुदा माना
दुश्मनी है तेरी दोस्ती से भी बेहतर
इसी लिये तुमको अपना मसीहा जाना
तेरे जुल्म पे भी हम को प्यार आता है
ऐसे नही कहती मुझे दुनिया तेरा दीवाना
हम तेरे जो बन गए अब ओर क्यों बनाता है
आज बहाना ,कल बहाना हर रोज तेरा बहाना
हेवानो के बीच है दुश्वार इंसानों का रहना
ना जाने क्यों हुआ जा रहा है हेवान यह जमाना
कारखानों मे मशीनों के शोर -गुल मे अर्पण
आज खो गया जवानों ,बच्चो का हसीन तराना
दिल मे प्यार हो तो जुबान से बयान कर दो
चाँद को चाहिए नही कभी बदलो मे छुपाना
भूले से कभी किसी से यह कह ना देना
रंगीन गलीचो के तले दबा है एक अफसाना
अर्पण को सारी दुनिया तो जाने है सनम
एक तू ही तो है जिस ने उस को ना पहचाना
राजीव अर्पण

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